कुंडली बताएगी आपके विवाह का रहस्य



 अपनी कुंडली से जाने विवाह होगा या नहीं और कब ?


  मनुष्य के जीवन में उसका जीवन संपूर्ण करने के लिए हमेशा ही एक अच्छे जीवन साथी की आवश्यकता होती है।  यदि जीवनसाथी न हो या अच्छा न हो तो जीते जीते भी नर्क का अनुभव होता है।  स्वास्थ्य ,और करियर के बाद इंसान ज्योतिष में जिस विषय के बारे में सबसे अधिक सवाल करता है या सोचता है , वह है उसकी शादी। 
शादी कब होगी , जीवनसाथी कैसा होगा , कहा से होगा ? कैसा दिखता होगा ? यही सारे प्रश्न एक ज्योतिष से हर रोज कई सारे लोग पूछते है।  आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम कुंडली के ऐसे योग के बारे में जानेंंगे।  


तो कुंडली में विवाह के योग दखने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण भाव है वो है कुंडली का सातवा घर।  शादी से जुड़े हुए ज्यादातर सवालों के जवाब इसी घर से निर्धारित किये जाते है।  

तो चलिए जानते है कब कब इंसान के जीवन में शादी में देरी होती है या शादी अच्छी नहीं चलती। 


Shri Rama Jyotish Peeth
Seventh House of Kundali 




1 . यदि सप्तमेश , कुंडली के छठे , आठवे या बारवे भाव में हो और उसे किसी प्रकार की शुभता प्राप्त न हो तो व्यक्ति को जीवनसाथी का सुख नहीं होता 

२. यदि छठे , आठवे या बारवे भाव का स्वामी सातवे भाव में हो ओट किसी प्रकार की शुभता प्राप्त न हो।  

3 यदि सप्तमेश , साथ ही छठे , आठवे या बारवे भाव का स्वामी भी हो। 

4 . यदि सप्तमेश , बारवे घर में हो और लग्नेश या जन्म राशि का स्वामी कुंडली के सातवे भाव में हो तो ऐसे में विवाह सुख नहीं होता और किसी योग के कारण अगर हो जाए तो वैवाहिक जीवन सुखद नहीं चलता 

5.  शुक्र या चंद्र की युति हो और उनसे सातवे भाव में शनि या मंगल हो तो भी वैवाहिक जीवन में बाधा होती है या विवाह सुख नहीं होता 

6. लग्न में , सप्तम में , बारवे भाव में यदि पाप ग्रह हो और चन्द्रमा पांचवे भाव में हो और निर्बल हो तो विवाह और संतान सुख में समस्या देता है 

7 .  सप्तम भाव या बारवा भाव में दो या अधिक पापग्रह हो और पंचम में चन्द्रमा हो तो विवाह और संतान सुख में कमी होती है 

८. शनि , चण्द्रमा , मंगल या राहु जैसे पापग्रह यदि सातवे भाव में हो तो विवाह में विलम्भ या जीवन साथी के सुख में कमी होती है 

9 . राहु के सातवे घर में होने के कारण कई बार शादी के बाद भी अवैध सम्बन्ध बन सकते है 

10 . शुक्र और बुध की युति भी सातवे भाव में विवाह सुख के लिए अच्छी नहीं है।  परन्तु यदि किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पड जाए तो विवाह होता है पर देरी से 

11 .  यदि धूम सप्तम भाव में हो तो ये भी विवाह सुख नहीं होने देता 

12 . शुक्र पाप ग्रह के साथ पंचम , सप्तम अथवा नवम भाव में हो तो भी विवाह सुख में बाधा उत्पन्न होती है 





तो पाठक गण कुंडली के इन योगो का होना हमारे और आपके जीवन में वैवाहिक सुख प्राप्ति में एक रुकावट है परन्तु सही समय , सही विधि और सही उपाय के द्वारा हम इन योगो के प्रभाव को काम कर सकते है। 

यदि आप में से कोई अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहता है तो हमसे इस नंबर पर whatsapp  कर सकता है 
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विवाह कुंडली